RAKSHA BANDHAN 2022: रक्षा बंधन का त्यौहार 12 अगस्त को मनाएं, जानें कारण

RAKSHA BANDHAN 2022: रक्षाबंधन का त्यौहार 12 तारीख शुक्रवार को मनाना श्रेष्ठ रहेगा।कारण यह है कि 11 तारीख गुरुवार को पूर्णिमा तिथि प्रातः 09:35 से लगेगी और उसी समय से भद्रा भी शुरू हो रही है, जो कि रात्रि में 8:53 तक रहेगी और दूसरे दिन यानी 12 अगस्त को प्रातः 7:16 तक पूर्णिमा रहेगी। बता दें कि भद्रा के अंदर कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। इसलिए इस समय तक रक्षा बंधन भी मनाना उचित नहीं होगा।इसलिए दूसरे दिन 12 तारीख शुक्रवार को ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाना श्रेष्ठ रहेगा।

रक्षाबंधन का त्यौहार 12 तारीख को ही मनाएं

उदया तिथि पूर्णिमा 12 अगस्त शुक्रवार को प्रातः 7:15 बजे तक ही है, अतः 12 अगस्त शुक्रवार को 7:30 बजे तक रक्षाबंधन का विशेष योग है लेकिन पूरे दिन बहनें अपने भाईयों को राखी बाँध सकती हैं, शास्त्रों में यही कहा गया है कि जो उदया तिथि है, उसी का मान दिन भर रहेगा। अतः मांगलिक कार्य पूरे दिन किये जा सकते हैं| इसलिए रक्षाबंधन का त्यौहार आप लोग 12 तारीख शुक्रवार को ही मनाएं पूरा दिन शुद्ध रहेगा।

भद्रा में राखी न बाँधने का ये है कारण

रक्षाबंधन पर भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। लंकापति रावण की बहन ने भद्राकाल में ही उनकी कलाई पर राखी बांधी थी और एक वर्ष के अंदर उसका विनाश हो गया था। भद्रा शनिदेव की बहन थी। भद्रा को ब्रह्मा जी से यह श्राप मिला था कि जो भी भद्रा में शुभ या मांगलिक कार्य करेगा, उसका परिणाम अशुभ ही होगा।

भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है रक्षा बंधन

हिन्दू संस्कृति के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर उनकी कलाई पर रक्षा का बन्धन बांधती है, जिसे राखी कहा जाता है। सावन मास में मनाये जाने के कारण इसे सावनी या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे धागे से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का पवित्र त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं।

जैसा कि आप सभी जानते है कि सामान्यतः राखी बहनें ही अपने भाई को बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों को भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है।

 

राखी के बदले भाई देते हैं उपहार

रक्षाबंधन के दिन बाजार में कई सारे उपहार बिकते है, उपहार और नए कपड़े खरीदने के लिए बाज़ार में लोगों की सुबह से शाम तक भीड़ रहती है। घर में मेहमानों का आना जाना रहता है। इस दिन भाईयों द्वारा अपनी बहन को राखी के बदले कुछ उपहार दिया जाता है। रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के प्यार को और मजबूत बनाता है|

ये है रक्षा बंधन की कथा

राखी का त्योहार कब शुरू हुआ इसका भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ

तब दानव देवताओं पर भरी पड़ते नजर आ रहे थे। भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये।

वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी।

उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बाँध दिया।

संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था।

लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे।

उसी दिन से सावन मास की पूर्णिमा के दिन यह धागा बाँधने की प्रथा चली आ रही है।

ये भी कथा है प्रचलित

एक अन्य मान्यता के अनुसार युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण की उंगली घायल हो गई थी,

भगवान कृष्ण की घायल उंगली को द्रौपदी ने अपनी साड़ी में से एक टुकड़ा बाँध दिया था

और इस उपकार के बदले श्री कृष्ण ने द्रौपदी को किसी भी संकट में सहायता करने का वचन दिया था।

राजा बलि और लक्ष्मी जी की कथा के अनुसार

कहते हैं कि एक बार राजा बलि रसातल में चला गया,

बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया।

भगवान के घर न लौटने से परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय बताया।

उस उपाय का पालन करते हुए लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उन्हें रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया

और अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आयीं।

उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी।

कहा जाता है कि तभी से सावन मास की पूर्णिमा को रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाता है|

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