Punjab exit poll 2022: किस कारण AAP को छोड़कर एग्जिट पोल को नकार रहे हैं सभी राजनीतिक दल, जानिए इसकी खास वजह

चंडीगढ़. पंजाब (Punjab) में 20 फरवरी के बाद हुए मतदान के बाद चुनावी नतीजों (election results) को लेकर आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) को छोड़ कर सभी सियासी दल (political parties) खामोश रहे. सभी 10 मार्च का इंतजार करने की बात कह रहे हैं. अब जबकि एग्जिट पोल में पंजाब में आप को प्रचंड बहुमत मिलता हुआ दिख रहा है. इसके बावजूद आप छोड़ पंजाब के सभी सियासी दल इसे नकार रहे हैं जबकि (AAP) मतदान के बाद से ही अपने बहुमत में आने के दावे पर कायम है. इसकी बड़ी वजह यह है कि कांग्रेस, अकाली के अपने सर्वे में अच्छी खासी सफलता मिल रही है. यही कारण है कांग्रेस और अकाली दल भी बहुमत में आने का दावा कर रहे हैं और 10 मार्च तक इंतजार करने की बात कर रहे हैं.

कांग्रेस (Congress) ने अपने स्तर पर चुनावी नतीजों को लेकर सर्वे किए हैं. उनके मुताबिक पार्टी को 50 सीटें आने की उम्मीद है. इसी तरह मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिरोमणि अकाली दल (SAD) के आंतरिक सर्वे में उन्हें 35 से ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद थी. इसी तरह भाजपा, पंजाब लोक कांग्रेस और अकाली दल संयुक्त (BJP, Punjab Lok Congress and Akali Dal S) गठबंधन यह मान कर चल रहा है कि उनके वोट बैंक शेयर में बढ़ातरी होगी और वे 10 से ज्यादा सीटें हासिल कर सकते हैं.

AAP के सर्वे में हार रहे हैं चन्नी और सिद्धू
आम आदमी पार्टी ने भी पंजाब में अपने स्तर पर सर्वे करवाए हैं और अब 80 से ज्यादा सीटें आने का दावा कर रही है. केजरीवाल के दावों पर नजर डाली जाए तो उनके मुताबिक पार्टी ने करवाए सर्वे में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी चुनाव हार रहे हैं. हालांकि पार्टी ने सभी सीटों पर करवाए सर्वे की किसी को भनक नहीं लगने दी है. 2017 में भी इसी तरह से एग्जिट पोल के बाद पंजाब में ऐसा ही माहौल था. पोल के मुताबिक AAP सरकार बना रही थी, लेकिन कांग्रेस को बहुमत मिला और 77 सीटों के साथ सत्ता में काबिज हुई.

क्यों हैं कांग्रेस बेफिक्र
यही वजह है कि पंजाब में जीत के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के पक्ष में सोमवार को हुए अधिकांश एग्जिट पोल के बावजूद मौजूदा कांग्रेस बेफिक्र नजर आ रही है क्योंकि पार्टी नेताओं ने कहा है कि वे सीमावर्ती राज्य में सत्ता बरकरार रखने को लेकर आश्वस्त हैं. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के पीछे दलितों के एकजुट होने की उम्मीद कर रहे है. उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल ने केवल एक चीज की ओर इशारा किया है कि मतदाता निर्णायक जनादेश चाहते थे. पीपीसीसी के पूर्व प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी कहा कि लोगों को तीन दिन और इंतजार करना चाहिए. कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि चन्नी दलित फैक्टर पर बड़ी गिनती करते रहे हैं.

क्या कह रहे हैं भाजपा के सहयोगी
85 वर्षीय अकाली दल के पूर्व नेता जिन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ाई लड़ी है उनका का कहना है कि उन्हें अच्छे प्रदर्शन की बहुत उम्मीद है. वह कहते हैं कि हमने भाजपा और पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) के साथ गठबंधन में 15 सीटों पर चुनाव लड़ा. हमारा मानना है कि हमारे कम से कम पांच-छह उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हैं, जबकि हम हर सीट पर लड़ाई में हैं. इसके विपरीत पीएलसी प्रमुख अमरिंदर सिंह काफी हद तक नजरों से ओझल रहे. सोमवार को वह दिल्ली में थे जहां उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. बैठक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि सामान्य चर्चा हुई है.

SAD सरकार बनाने को आश्वस्त
अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल, जिन्होंने मोर्चे से पार्टी की लड़ाई का नेतृत्व किया, वह करीब एक साल से चुनाव प्रचर में जुटे थे. राज्य भर के कार्यकर्ता परिणामों को लेकर औपचारिक बैठक के लिए उनके बादल गांव स्थित घर पर थे। पार्टी प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि हम सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त हैं और इसलिए बैठकें कर रहे हैं. संभावित गठबंधनों पर उन्होंने कहा कि सब कुछ परिणामों पर निर्भर करेगा.

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