Share Market Investment Tips FPI withdrawals in March FPI made huge withdrawals in just 3 days of March: जानिए क्यों भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं विदेशी निवेशक

नई दिल्ली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च के सिर्फ तीन कारोबारी दिवसों में ही भारतीय शेयर बाजारों से 17,537 करोड़ रुपये की निकासी कर ली है। यूक्रेन संकट (Ukraine crisis) की वजह से पैदा हुई अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से कारोबारी धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इसने एफपीआई की इस निकासी को रफ्तार देने का काम किया है। आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस महीने के तीन कारोबारी दिवसों में ही इक्विटी (Equity) से 14,721 करोड़ रुपये, डेट फंड (Debt Fund) से 2,808 करोड़ रुपये और हाइब्रिड साधनों (Hybrid Instruments) से नौ करोड़ रुपये निकाले हैं। इस तरह 2 से 4 मार्च के दौरान भारतीय बाजारों (Indian Stocks Markets) से कुल 17,537 करोड़ रुपये की निकासी विदेशी निवेशकों द्वारा की गई है।

यूक्रेन-रूस युद्ध से उपजी अनिश्चितता
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज (Geojit Financial Services) के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ‘यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग (Ukraine Russia War) से उपजी अनिश्चितता और कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम में आई तेजी ने कारोबारी धारणा को प्रभावित किया है।” इसके अलावा एफपीआई डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोर होती स्थिति को देखते हुए डेट फंड में भी बिकवाल बने हुए हैं।

यह भी है वजह
मॉर्निंगस्टार इंडिया (Morningstar India) के शोध प्रबंधक एवं एसोसिएट निदेशक हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि इस पैमाने पर भू-राजनीतिक तनाव पैदा होना भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा प्रवाह के नजरिये से अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजारों के उच्च मूल्यांकन के साथ कंपनियों की आय से जुड़े जोखिम और आर्थिक वृद्धि की सुस्त पड़ती रफ्तार ने विदेशी निवेशकों को भारतीय स्टॉक बाजार में खुलकर निवेश करने से रोकने का काम किया है।
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अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में आ रहा निवेश
कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड (Kotak Securities Limited) के इक्विटी शोध (खुदरा) प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा, ‘भारत को छोड़कर अन्य विकासशील बाजारों में एफपीआई प्रवाह फरवरी के महीने में सकारात्मक रहा। इंडोनेशिया में 1,22 करोड़ डॉलर, फिलीपींस में 14.1 करोड़ डॉलर, दक्षिण कोरिया में 41.8 करोड़ डॉलर और थाईलैंड में 193.1 करोड़ डॉलर का एफपीआई निवेश आया।’ उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यूक्रेन पर रूस के हमले और उसकी वजह से लगने वाली पाबंदियों के साथ ही मुद्रास्फीति बढ़ने और फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी किए जाने से एफपीआई प्रवाह अस्थिर रहने की आशंका है।

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