च्यूइंग गम के साथ बगैर हेलमेट उतरता था बल्लेबाज…गेंदबाजों के छूट जाते थे पसीने… ऐसा था क्रिकेटर का अंदाज

नई दिल्ली. वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज सर विवियन रिचर्ड्स (Vivian Richards Birthday) आज (7 March) अपना 70वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं. रिचर्ड्स दुनिया के इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने क्रिकेट और फुटबॉल विश्व कप खेला है. बेखौफ बल्लेबाजी के लिए फेमस रिचर्ड्स को मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) अपना आदर्श मानते हैं. 80 के दशक में जब यह दिग्गज बल्लेबाज मुंह में च्युंग गम चबाते हुए और बिना हेलमेट के क्रीज पर उतरता था, तो गेंदबाज भी गेंदबाजी करने से डरते थे. गेंदबाजों की लय बिगाड़ने में माहिर इस कैरेबियाई बल्लेबाज की बल्लेबाजी की पूरी दुनिया दीवानी थी.

विवियन रिचर्ड्स का जन्म 1952 में एंटीगा के सेंट जोंस शहर में हुआ था. दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 300 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेले. रिचर्ड्स ने 1974 में एंटीगा के लिए फीफा वर्ल्ड कप क्वालीफायर (FIFA World Cup Qualifiers) मैचों में ही खेला था. विश्व क्रिकेट में 80 से 90 के दशक में जब गेंदबाजों का बोलबाला था, उस समय रिचर्ड्स ने अपनी एक अलग पहचान बनाई. उन्होंने 1974 से 1991 के दौरान अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.

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नवंबर 1974 में भारत के खिलाफ बेंगलुरू में अपना टेस्ट करियर शुरू करने वाले रिचर्ड्स ने 121 टेस्ट मैचों में 24 शतकों और 45 अर्धशतकों की मदद से 8540 रन बनाए, जिसमें 291 रन उनका बेस्ट स्कोर रहा. रिचर्ड्स ने इस दौरान 50 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से रन जुटाए. 187 वनडे इंटरनैशनल में इस कैरेबियाई बल्लेबाज के नाम 6721 रन दर्ज हैं, जिसमें 11 शतक और 45 अर्धशतक हैं. वनडे में रिचर्ड्स की स्ट्राइक रेट 90 से ज्यादा की थी, जिसके सभी मुरीद थे.

189 रन की खेली ऐतिहासिक पारी
विवियन रिचर्ड्स की नाबाद 189 रन की पारी वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक कायम रही. 1979 के विश्व कप के फाइनल में रिचर्ड्स ने 138 रन की धमाकेदार पारी खेली थी. रिचर्ड्स ने विंडीज की ओर से 4 विश्व कप (975, 1979, 1983,1987 ) खेले.

सचिन तेंदुलकर के रहे आदर्श
अपने फैंस के बीच ‘भगवान’ का दर्जा हासिल करने वाले महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर दिग्गज विवियन रिचर्ड्स को अपना आदर्श मानते हैं. इस पूर्व कैरेबियाई कप्तान की वजह से ही सचिन का अंतरराष्ट्रीय करियर 3-4 साल और बढ़ा था. सचिन उनकी बखौफ बल्लेबाजी के मुरीद थे. सचिन ने कई बार यह स्वीकार किया कि डिफेंस करते समय उनके आदर्श सुनील गावस्कर होते थे जबकि विध्वंसक रुख अख्तियार करने के लिए रिचर्ड्स आदर्श होते थे. रिचर्ड्स दो बार विश्व विजेता बनने वाली कैरेबियाई टीम का हिस्सा रहे हैं.

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