अगले हफ्ते इन 6 फैक्टर्स का बाजार पर दिखेगा असर, बना रह सकता है प्रेशर

Stock Market : यूरोप में क्राइसिस के चलते एक और हफ्ते में गिरावट जारी रहने के साथ घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स में मार्केट ट्रेंड्स में कोई बदलाव नहीं आया है। एनालिस्ट्स ने आगाह किया है कि इसे हफ्ते भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

बाजार के पार्टिसिपैंट्स का ध्यान रूस-यूक्रेन क्राइसिस (Russia-Ukraine crisis) और उसके क्रूड पर प्रभाव पर बना रहेगा। इसके अलावा, घरेलू मोर्चे पर पार्टिसिपैंट्स की नजर पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के चुनाव के 10 मार्च को आने वाले नतीजों पर भी रहेगी।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग के वीपी रिसर्च अजित मिश्रा ने कहा, “बैंकिंग के साथ ही क्रूड पर खासे निर्भर सेक्टर/ स्टॉक्स पर प्रेशर बना हुआ है, वहीं मेटल, आईटी और चुनिंदा एनर्जी स्टॉक्स तेजड़ियों को कुछ राहत देने की कोशिश कर रहे हैं। हम चुनिंदा शेयरों में खरीदारी और मार्केट में स्थिरता आने तक अपनी लीवरेज पोजिशन पर नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।”

इस सप्ताह निम्नलिखित फैक्टर्स इनवेस्टर्स के रडार पर रह सकते हैं :

यूक्रेन जंग

Ukraine war : यूक्रेन पर रूस के हमले लगातार तेज हो रहे हैं और हालात में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। पश्चिम देशों ने प्रतिबंद लगा दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों को तगड़ा झटका लगा है। आपूर्ति की बाधाओं ने एनर्जी मार्केट को तगड़ा झटका दिया है और इसके चलते तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं।

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Inflation : जंग का यह एक अन्य दुष्परिणाम है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि फ्यूल की कीमतें बढ़ने से भारत सरकार का बजट बिगड़ सकता है। इसके अलावा, गेहूं, पॉम ऑयल और कोयला भी आने वाले दिनों में आम आदमी का झटका देंगे। इससे इनवेस्टर्स को कैश की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

राज्य के चुनाव

State elections : बाजार की 10 मार्च को आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों पर भी नजर रहेगी। अगर प्रमुख राज्यों में सत्तारूढ़ दल को शिकस्त मिलती है तो बाजार पर इसका निगेटिव असर हो सकता है। एनालिस्ट का मानना है कि इसका सीमित असर होगा।

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एफआईआई की बिकवाली

FII outflow : मार्च के सिर्फ तीन सेशंस में, विदेशी निवेशकों ने इक्विटी बाजारों में 14,721 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। वहीं मौजूदा कैलेंडर ईयर में पिछले दो महीनों में हुई 70,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की तुलना में यह काफी अहम है। एनालिस्ट्स को आशंका है कि यह बिकवाली जारी रहेगी और उन्होंने इनवेस्टर्स को सतर्क रहने की सलाह दी है।

मैक्रो डाटा

Macro data : इनवेस्टर्स की नजर इंड जनवरी के इंडस्ट्रिय प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन के आंकड़ों पर भी रहेगी। ये दोनों आंकड़े सुधरने का अनुमान है, क्योंकि इकोनॉमी काफी हद तक कोविड से पहले के सामान्य स्तर पर आ गई है, लेकिन यदि डाटा उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे तो यह बाजार पर निगेटिव रह सकता है।

टेक्निकल आउटलुक

Technical outlook : निफ्टी50 (Nifty50) पर प्रेशर बना हुआ है और यह निगेटिव बंद हुआ है। वॉलेटिलिटी खासी ज्यादा है और सप्ताह में लगभग हर दिन इंडेक्स खासे ज्यादा अंतर के साथ खुला है।

सैमको सिक्योरिटीज की हेड (इक्विटी रिसर्च) येशा शाह ने कहा, “बड़े अपट्रेंड को एक स्ट्रक्चरल नुकसान हुआ है, इसलिए हम अपना फिर से दोहराते हैं कि ट्रेड को मंदी के रुझान के साथ सतर्क रहना चाहिए। हालांकि, शॉर्ट कवरिंग से जुड़ी कुछ उछाल से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि जिओपॉलिटिकल घटनाक्रम आगे भी बाजारों को प्रभावित करते रहेंगे। निफ्टी50 को 16,800 पर तात्कालिक रेजिस्टैंस और 16,200 पर सपोर्ट बना हुआ है।”

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